TECHNOLOGY

कफ सिरप कांड : बच्चों की मौत, फर्जी फर्मों का जाल, राजनीतिक रसूख और विभागीय चूक — कितनी बड़ी है कफ सिरप माफिया की जड़ें?

✍️ लेखक: विजय श्रीवास्तव(स्वतंत्र पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक) देश में बच्चे मरते रहे, मां-बाप चीखते रहे, डॉक्टर बेबस देखते रहे—लेकिन सरकार, विभाग और दवा माफिया की तिकड़ी आराम से बैठी…

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HEALTH

कफ सिरप कांड : बच्चों की मौत, फर्जी फर्मों का जाल, राजनीतिक रसूख और विभागीय चूक — कितनी बड़ी है कफ सिरप माफिया की जड़ें?

✍️ लेखक: विजय श्रीवास्तव(स्वतंत्र पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक) देश में बच्चे मरते रहे, मां-बाप चीखते रहे, डॉक्टर बेबस देखते रहे—लेकिन सरकार, विभाग और दवा माफिया की तिकड़ी आराम से बैठी…

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अवैध घुसपैठियों का चुनावी महाभारत : असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की राजनीति?

✍️ लेखक: विजय श्रीवास्तव(स्वतंत्र पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक) देश की राजनीति में मुद्दों की कोई कमी नहीं है—महंगाई सिर पर चढ़ी हुई, बेरोजगारी रिकॉर्ड तोड़ रही, रुपये की हालत अस्पताल…

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POLITICS

कफ सिरप कांड : बच्चों की मौत, फर्जी फर्मों का जाल, राजनीतिक रसूख और विभागीय चूक — कितनी बड़ी है कफ सिरप माफिया की जड़ें?

✍️ लेखक: विजय श्रीवास्तव(स्वतंत्र पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक) देश में बच्चे मरते रहे, मां-बाप चीखते रहे, डॉक्टर बेबस देखते रहे—लेकिन सरकार, विभाग और दवा माफिया की तिकड़ी आराम से बैठी…

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अवैध घुसपैठियों का चुनावी महाभारत : असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की राजनीति?

✍️ लेखक: विजय श्रीवास्तव(स्वतंत्र पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक) देश की राजनीति में मुद्दों की कोई कमी नहीं है—महंगाई सिर पर चढ़ी हुई, बेरोजगारी रिकॉर्ड तोड़ रही, रुपये की हालत अस्पताल…

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TRAVEL

कफ सिरप कांड : बच्चों की मौत, फर्जी फर्मों का जाल, राजनीतिक रसूख और विभागीय चूक — कितनी बड़ी है कफ सिरप माफिया की जड़ें?

✍️ लेखक: विजय श्रीवास्तव(स्वतंत्र पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक) देश में बच्चे मरते रहे, मां-बाप चीखते रहे, डॉक्टर बेबस देखते रहे—लेकिन सरकार, विभाग और दवा माफिया की तिकड़ी आराम से बैठी…

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SPORTS

कफ सिरप कांड : बच्चों की मौत, फर्जी फर्मों का जाल, राजनीतिक रसूख और विभागीय चूक — कितनी बड़ी है कफ सिरप माफिया की जड़ें?

✍️ लेखक: विजय श्रीवास्तव(स्वतंत्र पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक) देश में बच्चे मरते रहे, मां-बाप चीखते रहे, डॉक्टर बेबस देखते रहे—लेकिन सरकार, विभाग और दवा माफिया की तिकड़ी आराम से बैठी…

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