नाम बदलो राजनीति : जनता के असली सवालों से ध्यान भटकाने का संगठित खेल

✍️ लेखक: विजय श्रीवास्तव(स्वतंत्र पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक) योजनाओं और शहरों के नाम बदलकर लोकतंत्र नहीं,…

कर्नाटक की सियासी उथल-पुथल : कुर्सी की जंग, गुटबाजी और जातीय समीकरण, BJP शांत लेकिन तैयारी पूरी!”

✍️ लेखक: विजय श्रीवास्तव(स्वतंत्र पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक) कर्नाटक राजनीति में इन दिनों जो सियासी तूफान…

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SIR : चुनाव आयोग की ‘तेजी-हड़बड़ी’ या नई कहानी की शुरुआत?

✍️ लेखक: विजय श्रीवास्तव(स्वतंत्र पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक) जब चुनाव दूर हैं, तो यह हड़बड़ी क्यों?…

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एक्ज़िट पोल – लोकतंत्र का नया तमाशा या टीआरपी का व्यापार या सट्टा बाजार और शेयर मार्केट का खेल

✍️ लेखक: विजय श्रीवास्तव(स्वतंत्र पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक) बिहार चुनाव खत्म, लेकिन खेल जारी है बिहार…

पवन सिंह – ज्योति सिंह विवाद: राजनीति, प्रतिष्ठा और नैतिकता की जंग

क्या भाजपा का “सुपरस्टार कार्ड” उल्टा पड़ सकता है? (By Vijay Srivastava / Political Desk) निजी…

“Bihar Election 2025 : क्या बिहार में ₹10,000 वाली स्कीम गेम चेंजर साबित होगा और महिलाएं बनेंगी किंग मेकर?”

महिलाओं की निर्णायक भूमिका का दौरBihar की राजनीति का यह Election एक नए मोड़ पर खड़ा…

” GST 2.0 सुधार : क्षणिक या दूरगामी ?”

दीपेंद्र श्रीवास्तवराजनीतिक विश्लेषण विरोध से आराधना तक: राजनीति की करवटें वर्ष 2011 में UPA सरकार ने…

आखिर कब तक फिल्मी कलाकारों और क्रिकेटरों के भरोसे राजनीति की दुकान चलेगी?

भारतीय राजनीति में लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत जनता मानी जाती है। जनता की उम्मीदें उन…

रावण अमर है : हर मंच पर, हर रूप में-एक व्यंग्य

हर साल दशहरा आता है। भीड़ उमड़ती है। पटाखों के शोर और ढोल-नगाड़ों के बीच रावण…

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 : त्रिकोणीय जंग

बिहार की राजनीति का बदलता परिदृश्य बिहार की राजनीति हमेशा से जटिल समीकरणों पर आधारित रही…