अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे और दान की वस्तुओं को लेकर उठे विवाद थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। चढ़ावे से जुड़े कथित अनियमितताओं की एसआईटी जांच जारी रहने के बीच अब रामलला को दान में दी गई 200 चांदी की ईंटों के लापता होने का नया मामला सामने आया है, जिसने श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विश्व सिंधी सेवा संगम के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष राजू मनवानी ने मीडिया के सामने दावा किया है कि सिंधी समाज की ओर से लगभग दो क्विंटल चांदी की 200 ईंटें श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को दान स्वरूप सौंपी गई थीं। उनका आरोप है कि ये ईंटें कारसेवकपुरम में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को दी गई थीं, लेकिन आज तक न तो दान की कोई आधिकारिक रसीद दी गई और न ही यह बताया गया कि इन ईंटों का उपयोग किस कार्य में किया गया।
मनवानी ने कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में पारदर्शिता सर्वोपरि होनी चाहिए। यदि इतना बड़ा दान रिकॉर्ड में मौजूद है तो उसकी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए, और यदि नहीं है तो इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
इस बीच सरकार द्वारा गठित एसआईटी पहले से ही मंदिर से जुड़े चढ़ावे और दान की वस्तुओं की जांच कर रही है। ऐसे में चांदी की ईंटों के कथित गायब होने का आरोप जांच एजेंसियों के लिए एक नया और गंभीर विषय बन गया है।
विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि जब देशभर से श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और विश्वास के साथ दान कर रहे हैं, तब दान की प्रत्येक वस्तु का सार्वजनिक लेखा-जोखा होना चाहिए। वहीं ट्रस्ट की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर दो क्विंटल चांदी की 200 ईंटें कहां हैं? क्या उनका उपयोग मंदिर निर्माण में हुआ, या फिर वे रिकॉर्ड से ही गायब हो गईं? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में एसआईटी जांच और ट्रस्ट की सफाई से ही स्पष्ट हो सकेंगे।
