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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ अब एक नए विकास युग में प्रवेश करने जा रही है। दिल्ली-एनसीआर की तर्ज पर प्रस्तावित स्टेट कैपिटल रीजन (SCR) को लेकर शासन ने बड़ी तैयारी शुरू कर दी है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में क्षेत्र के समग्र विकास के लिए 29 महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई। यह योजना आने वाले वर्षों में लखनऊ और आसपास के जिलों की तस्वीर बदल देगी।
SCR के तहत लखनऊ के साथ बाराबंकी, सीतापुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली और अन्य आसपास के क्षेत्रों को एकीकृत विकास मॉडल के तहत जोड़ा जाएगा। सरकार का उद्देश्य राजधानी क्षेत्र को उत्तर भारत का नया आर्थिक, औद्योगिक और निवेश केंद्र बनाना है।
क्या-क्या बदलने वाला है?
योजना के तहत कई बड़ी परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। इनमें—
- नए औद्योगिक कॉरिडोर और निवेश क्षेत्र
- लॉजिस्टिक पार्क और वेयरहाउस हब
- रिंग रोड और हाई-स्पीड कनेक्टिविटी नेटवर्क
- क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS)
- मेट्रो विस्तार परियोजनाएं
- इंटीग्रेटेड टाउनशिप और स्मार्ट सिटी क्लस्टर
- मेडिकल सिटी, एजुकेशन हब और आईटी पार्क
- एक्सप्रेसवे आधारित आर्थिक जोन
- मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब
जैसी परियोजनाएं शामिल हैं।
सरकार का फोकस केवल शहरी विस्तार पर नहीं बल्कि रोजगार, निवेश और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर भी है ताकि लखनऊ के विकास का लाभ आसपास के जिलों तक पहुंचे।

कब तक धरातल पर उतर सकती है योजना?
विशेषज्ञों के अनुसार SCR का मास्टर प्लान अंतिम चरण में पहुंच रहा है। 2026-27 तक अधिकांश परियोजनाओं की डीपीआर, भूमि चिन्हांकन और स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है।
यदि सब कुछ तय समय पर चलता रहा तो—
- 2027 तक प्रमुख परियोजनाओं का शिलान्यास शुरू हो सकता है।
- 2028-29 तक बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य दिखाई देने लगेंगे।
- 2030 तक SCR का पहला विकसित स्वरूप सामने आ सकता है।
यानी अगले चार से पांच वर्षों में इस क्षेत्र में विकास की गति बेहद तेज होने की संभावना है।
हाईवे किनारे जमीनों के रेट में कितना उछाल?
रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि SCR का सबसे बड़ा फायदा हाईवे और एक्सप्रेसवे से जुड़े इलाकों को मिलेगा। दिल्ली-एनसीआर, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे के अनुभव बताते हैं कि जहां बड़ी आधारभूत परियोजनाएं पहुंचती हैं, वहां जमीनों की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं।
संभावित बढ़ोतरी
- प्रमुख हाईवे किनारे कृषि भूमि में 3 से 5 वर्षों में 40 से 80 प्रतिशत तक वृद्धि संभव।
- औद्योगिक पार्क और लॉजिस्टिक हब के आसपास जमीनों के दाम दोगुने तक हो सकते हैं।
- रिंग रोड, RRTS और मेट्रो कॉरिडोर से जुड़े क्षेत्रों में 60 से 150 प्रतिशत तक मूल्य वृद्धि की संभावना।
- लखनऊ-उन्नाव, लखनऊ-बाराबंकी, लखनऊ-रायबरेली और लखनऊ-सीतापुर मार्ग निवेशकों के लिए हॉटस्पॉट बन सकते हैं।
रियल एस्टेट सलाहकारों का कहना है कि जो लोग अभी योजनाबद्ध तरीके से जमीन खरीदते हैं, उन्हें अगले पांच से सात वर्षों में उल्लेखनीय लाभ मिल सकता है।

क्यों कहा जा रहा है—आज का सुरक्षित निवेश, कल का खजाना?
SCR केवल एक विकास परियोजना नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश की नई आर्थिक राजधानी बनाने की रणनीति का हिस्सा है। जैसे दिल्ली-एनसीआर ने गुड़गांव, नोएडा और ग्रेटर नोएडा की तकदीर बदली, वैसे ही SCR लखनऊ के आसपास के जिलों को नई पहचान दे सकता है। सरकारी निवेश, बेहतर कनेक्टिविटी, उद्योगों की आमद और बढ़ती आबादी के कारण जमीन की मांग लगातार बढ़ेगी। यही कारण है कि रियल एस्टेट बाजार के जानकार इसे आने वाले दशक का सबसे बड़ा अवसर मान रहे हैं। यदि योजनाएं तय समय पर आगे बढ़ती हैं तो आज की खरीदी गई जमीन कल निवेशकों के लिए वास्तव में “खजाना” साबित हो सकती है।
